काली का जो ध्यान लगाते। मृत्यु पर भी विजय वो पाते। डूबे जो इसके भक्ति रस में। सिद्धियाँ भी होतीं उनके बस में। किसी विपद में वो न भटके। किसी के ननों में न खटके। उन्हें न चिंता कभी सताती। मंज़िल उनके पास है आती। इसका जो हैं जो आश्रय लेते। श्रद्धा की पुष्पांजलि भरते। उनकी करती है रखवाली। दक्षिणा काली खप्पर वाली।चरण कमल से जुड़े ही रहिये। मुँह से चाहे कुछ न कहिये। अन्तर्भाव वो सबके जाने। खोटा खरा वो सब पहचाने। सर्व व्यापक घाट घाट वासी। अजिर अमर माँ है अविनाशी।